चिंगारी

चिंगारी दिल मेँ जली है,
अब इसे कौन बुझा सकता है।
जब खता की ही नहीं,
तो सजा कौन दिला सकता है।
यह दुनिया तो झूठी है,
अदालत को सच कौन बता सकता है।
चिंगारी दिल मेँ जल्दी है,
अब इसे कौन बुझा सकता है।

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  1. डी. के. निवातिया D K 09/09/2015

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