==* किमत *==

तू कहती रही वो तेरी दास्ताँ
सुननेवाला मगर कोई न था
तेरी तकलीफे थी दर्दों भरी
जाये समझ ऐसा कोई न था

वो रुसवा हुई जब तेरी आबरू
किसी को भी फर्क पड़ना न था
तू मरती रही अकेली सडकपर
किसी को भी तुझसे मतलब न था

तू करती रही मिन्नते बार बार
भीड़ मे हो खड़ा कोई इंसाँ न था
तू रोती रही भटकी यहाँ से वहा
पोंछलें तेरे आँसू ऐसा कोई न था

उठा है जो परदा तेरे जिस्म से
आवाज तेरी कोई उठायेगा क्या
नसीब ही तेरा गरीबी मे पैदा हुवाँ
जान की आखीर तेरे किमत ही क्या

नसीब ही तेरा गरीबी मे पैदा हुवाँ
जान की आखीर तेरे किमत ही क्या
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✒ शशिकांत शांडिले, नागपूर
भ्रमनध्वनी – ९९७५९९५४५०

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/09/2015
    • शशिकांत शांडिले SD 08/09/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/09/2015
    • शशिकांत शांडिले SD 08/09/2015
  3. Bimla Dhillon 08/09/2015
    • शशिकांत शांडिले SD 08/09/2015
  4. asma khan asma khan 23/11/2015

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