जिन्दा लाश चलती फिरती है !!

      न पूछो मेरी महफूजियत का आलम
      तेरी दुआओ से मेरी जिंदगी चलती है !

      मुख से हटे नकाब चाँद रोशन हो जाए
      जब झुके तेरी नजर लगे शाम ढलती है !

      हमने तो कर दिया खुद को हवाले तेरे
      जब तक है तू साथ, ये नब्ज चलती है !

      होती है रुसवा तेरी परछाई जब जब
      लगे जिस्म से अब जान निकलती है !

      टूट जाती है उम्मीदे जीने की जमाने में
      तब एक तू मेरे जीने की वजह बनती है !

      इस कदर शामिल है तू मेरी जिंदगी में
      जैसे सागर में लहरे टूट के बिखरती है !

      कौन कहता है “धर्म” मुर्दो में जान नही होती
      एक तेरे सहारे ये जिन्दा लाश चलती फिरती है !!

      डी. के निवातियाँ _______###

10 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 07/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/09/2015
      • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/09/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir 07/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/09/2015
  3. omendra.shukla omendra.shukla 08/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/09/2015
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/09/2015
  5. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 08/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/09/2015

Leave a Reply