चुने मैंने …….

चुने मैंने …….
चुने, मैंने ख्वाबों के हैं पर चुने ,
सुने, मैंने ख्वाहिशों के हैं धुन सुने .
कुछ ना कहा फिर भी सुना ,मन ये अक्सर बहता हुआ ,
राहे हैं खफा, मंजिले जुदा, फिर भी जी ले केहता हुआ .
आओ चलो, मन ये उड़ने चला, केहता बहने चला .
रहें, आँखों में नमी अब भी हैं रहें ,
कहे, रूठे दिल से मैंने है कुछ कहे ,
जीले तू ये पल, हो न जा ओझल, खुद तेरी नजरो से तू ,
बाहे तू फैला, और समां जा खुद को खुद से करके जुदा .
ये पल नहीं लौट के आएगी, तेरी रौशनी राहे दिखलाएगी.
चुने मैंने ख्वाबों के हैं पर चुने ……….
Nitesh banafer(kumar aditya)

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