तुम हिन्दू हो ! निज हिन्दू धर्म निभाओना …

तुम हिन्दू हो ! निज हिन्दू धर्म निभाओना
माँ कहते हो जिस गौ को ,
तुम उसकी लाज बचाओना
देती है जो दूध तुम्हे ,
खुद के बच्चो से छीन स्वयं ,
करती तुम्हारे उत्सवों को उज्जवल
रूखी-सुखी खाकर स्वयं,
चाँद स्वार्थ के खातिर
तुम मेरी भेंट चढाओना
तुम हिन्दू हो ! निज हिन्दू धर्म निभाओना….
क्यों बांध रस्सियों से मुझको
बेचते हो तुम कसाईयों को
मन न्यौक्षावर करती मै तुमपे ,
जीवन करती तुमको मै अर्पण
फिर बदले में क्यों दर्द मुझे तुम देते हो
कुछ तो तरस मुझपे अब खाओना
तुम हिन्दू हो ! निज हिन्दू धर्म निभाओना…
बूढी होने पे भी मै
काम तुम्हारे ही आउंगी ,
गोबर निर्मित अपने उपलों से
ईंधन तुम्हारा बचाउंगी
कृत्रिम खादों के रूप में बनकर
खेतो की उपज बढ़ाउंगी ,
मेरे इस करुण -क्रंदन को
हिय में अपने तुम बसाओना
तुम हिन्दू हो ! निज हिन्दू धर्म निभाओना …
रूखी-सुखी खाके मै तुम्हारा
टूटे खपरैलों में रह लुंगी ,
सौदा ना करो जीवन का मेरे
मै दर्द तुम्हारे सह लुंगी ,
ना बेचों उन दरिंदो के हाथों में मुझको
मै झुधायुक्त जीवन जी लुंगी ,
मेरे उन उपकारों को
ऐसे तुम बिसराओना
तुम हिन्दू हो ! निज हिन्दू धर्म निभाओना …

4 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 05/09/2015
    • omendra.shukla omendra.shukla 07/09/2015
  2. डी. के. निवातिया D K Nivatiya 07/09/2015
    • omendra.shukla omendra.shukla 07/09/2015

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