जीवो पे दया करना सीखो

बलि देते थे हम निर्दोषों की
खुद आज बलि हम हो रहे
नाम लेके धर्म का ,
अपमान खुद का क्यों कर रहे
उन निर्दोषों के पापों को
आतंक के रूप में आज हम झेल रहे
खुद की गर्दन कटी तो
दर्द समझ आया हमको ,
काटते थे शीश दिन -रात जब
तो दर्द कभी ना आया हमको
होके भागीदार पाप का
अंश हम अब झेल रहे जीवो पे दया करना सीखो
बलि देते थे हम निर्दोषों की ,खुद आज बलि हम हो रहे….
शुरू हुआ है आतंक का तांडव
जो ना अब थमने वाला
पापो की है यह एक झलक हमारी
व्यथनो से ना जो रुकने वाला
जीना है यदि दुनिया में
तो दया -दृष्टी से तुम जीना सीखो
ना काटो ,ना खाओगे हमको
संकल्प यही लेना सीखो
पालन कर धर्मो का अपने ,

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