जाति की दीवार

चल चलते है वहाँ
जहाँ ना जाति की दीवार हो
जिन्दगी मे है नही
कुछ ओर इसकी निशानी
बाँट दिया इन्सान इसने
भर दिये आँखो मे पानी
लाखो मिट गये यहाँ
किसको खबर है
पर गये कुछ तोडकर
इसकी गुलामी
चारो ओर फैली हवा
बस यही तो बोलती है
जाति हृदय में समाकर
ज हर ही तो घोलती है
अच्छाई ही बने पहचान
बस ऐसा संसार हो
चल चलते है वहाँ
जहाँ ना जाति की दीवार हो
सुना नही मैंने कही भी
देवो को बँटते हुए
पशुओ को भी तो जंहा मे
जाति मे लडते हुए
पंछियो ने भी यहाँ पै
एक सी पहचान पायी
नाम अलगअलग हो भले ही
एक सी उडान पायी
बँट गया इन्सान फिर क्यू
किसने ये जाति बनायी
कौन सा अमृत मिला जो
मानवता की की छंटाई
मानवता हो पहचान
सबका बस यही अरमान हो
चल चलते है वहाँ
जहाँ ना जाति की दीवार हो
प्रेम का दुश्मन भला क्यू
जहाँ मे सिर तान आया
बंदिशो मे बाँध दे जो
कौन सा तुफान आया
कृष्ण सुदामा का
प्रेम तो जग मे अमर है
ऊँची नीच के मेल का
सच्चा सफर है
फिर भला क्यू
इन्सान मे अभिमान आया
प्रेम को कैसे यहा पर
जाति मे तुमने बँधाया
तोड दे जाति के बँधन
ऐसे सब इन्सान हो
चल चलते है वहाँ
जहाँ ना जाति की दीवार हो
जाति ने दंगे कराये
जाति ने है प्राण लिए
ना जाने कितने मासूमो के
प्रेमके बलिदान लिए
चलो मान लेते है हम
वो प्रेम से अन्जान है
कोई तो आकर बताये
प्रेम किस जाति का नाम है
जाति ने बाँटे है दिल
और बाँटी सारी सरहदे
बाँट दिया अब तो खुदा भी
जिला डाली देश की जडे
जाति का खंजर हो टूटा
प्रेमका सम्मान हो
चल चलते है वहाँ
जहाँ
ना जाति की दीवार हो

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