मुक्ति

हवा बहती है,
सुनो क्या कहती है I
कहती है-
संग मेरे उड़ चलो,
कोल्हू के बैल वाले इस जीवन को छोड़ो,
चलो! संग मेरे तुम कही दूर चलो I
चलो वहा, जहाँ मुक्ति है,
दूर, कहीं बहुत दूर,
जहाँ आकाश धरती पर झुकती है I
चलो! उस स्वप्न राज्य में,
जहाँ कोई बंधन नही I
जीवन है खुशहाल जहाँ,
शोक नही, ना है क्रंदन कही I
छोड़ो, जीवन के इन
अंधियारी गलियों को,
चलो! राजपथ की और मुड़ चलो,
दूर चलो, संग मेरे तुम उड़ चलो!
-पार्थ

4 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 04/09/2015
    • पार्थ पार्थ 04/09/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/09/2015
    • पार्थ पार्थ 04/09/2015

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