गुरुवर को शत शत नमन……..!

    1. जिसने ‘मरा’ शब्द से
      “राम” उच्चारण करा दिया!
      जिसने देकर एक मन्त्र
      डाकू से वाल्मीकि बना दिया !
      ऐसे गुरुवर को शत शत नमन !!

      जिसने सम्पूर्ण जग को
      शसक्त विचारो से झकझोर दिया
      जिसने विवेकानंद जैसा
      जग में अनमोल हीरा तराश दिया
      ऐसे गुरुवर को शत शत नमन !!

      जिसने जीवन दर्शन का
      दुनिया को एक नया आयाम दिया
      जिसके पथ प्रदर्शन ने
      डाकू से अंगुलिमाल संत बना दिया
      ऐसे गुरुवर को शत शत नमन !!

      जिसने एक प्रेमी को
      दुनिया के विद्वानो में दर्ज करा दिया
      जिसके मार्ग दर्शन से
      रामबोला को “तुलसीदास” बना दिया !!
      ऐसे गुरुवर को शत शत नमन !!

      प्रारंभिक जीवन से अनपढ़
      युवक को विक्रमादित्य दरबार का रत्न मिला
      जिसने अपने संस्कार से
      एक मुर्ख को महापंडित कालिदास बना दिया
      ऐसे गुरुवर को शत शत नमन !!

      जब दुनिया उलझी थी
      हिसाब किताब में, नही था कोई उपाय
      भारत में अवतरित हुआ,
      ऐसा महापुरुष जिसने शून्य का ज्ञान दिया !
      ऐसे गुरुवर को शत शत नमन !!

      जिसने अपने दम पर
      सत्यता का नया आविष्कार किया
      जिसने दुनिया को
      अहिंसा का एक नया हथियार दिया
      बनकर नायक जग में
      मोहनदास को महात्मा गांधी में ढाल लिया !
      ऐसे गुरुवर को शत शत नमन !!

      जिसे ठुकराया जमाने ने
      फिर एक हस्ती ने प्रतिभा को पहचाना
      देकर अपना धन और नाम
      शिक्षा यापन के जीवन में उतार दिया
      फिर उस शख्सियत ने
      लेकर डिग्रियाँ अपार जोहर अपना दिखा दिया
      झुकने लगा फिर ज़माना
      भीमराव से आंबेडकर जैसा रत्न बना दिया
      ऐसे गुरुवर को शत शत नमन !!

      सामान्य कुल में जन्मे
      एक बालक ने दुनिया को हाथोे में थाम लिया
      पढ़ी जिसने गीता कुरान
      एक संग हर धर्म का बराबर सम्मान किया
      धरती से अम्बर तक
      जिसने अपने नाम का परचम लहरा दिया
      बस छोटी सी पहचान उसकी
      नाम जिसे “डॉ. ऐ. पी. जे अब्दुल कलाम” मिला
      ऐसे गुरुवर को शत शत नमन !!

      तमिलनाडु के गरीब कुल में
      विद्वान परिवार में जन्मे एक बालक
      शिक्षा में प्रखर तेजस्वी
      जिसने अपना जीवन सम्पूर्ण त्याग दिया
      जीवन बहुत ही छोटा है
      परन्तु इसमें व्याप्त खुशियाँ अनिश्चित भली भाँति जान लिया
      सादगीपूर्ण सन्तोषवृत्ति ही
      जिसने अपने जीवन का कर्म और मूल मन्त्र मान लिया
      हम सबको जिसने सिखाया
      “समूचा विश्व एक विद्यालय ” मानने का आधार दिया
      उसकी महानता याद रहे
      इसलिए भारत ने शिक्षक दिवस मनाने का ठान लिया
      ऐसे गुरुवर को शत शत नमन !!

      भारत की पावन धरा पर
      जितने भी महापुरुषों ने जन्म लिया
      सभी महान विभूतियों को
      शीश झुका कर हम सब ने प्रणाम किया
      उन गुरुजनो को
      प्रार्थी “डी. के. निवातियाँ” का शत शत नमन !!
      !
      V
      !
      V
      [[ रचना कार – “डी. के. निवातियाँ” ]]

7 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 04/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/09/2015
  2. पार्थ पार्थ 04/09/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/09/2015
  4. omendra.shukla omendra.shukla 05/09/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/09/2015

Leave a Reply