अपनी बात

कविताओं की
कलाओं में
साहित्य की
सभाओं में
क्यों उलझूं
’मैं’
मुझे तो
अपनी बात
सीधे कहनी है
शब्द के
आडम्बरों से परे
इशारों से भी पहले
समझ ले कोई
’बस’
ऐसी लेखनी कहनी है

Kashmir Singh

2 Comments

  1. gyanipandit 03/09/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/09/2015

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