मेरे दिल कहीं और चल

ये मेरे दिल कहीं और चल ,
इस चमन में अब अपना गुजारा नहीं ,
बात होती साल दो साल की तो सह लेते हम ,
अब पूरी जिंदगी पर हक़ हमारा नहीं
ये मेरे दिल कहीं और चल ,
इस चमन में अब अपना गुजारा नहीं ,

सींचा था जिस बगिया को अपने खून से
वो ही कहती है की तूने हमें संवारा नहीं ,
ये मेरे दिल कहीं और चल ,
इस चमन में अब अपना गुजारा नहीं ,

दोस्त जो दिन रात रहते थे अपने दिल में ,
वो ही कहते हैं की वक़्त पर तुमने हमें पुकारा नहीं ,
ये मेरे दिल कहीं और चल ,
इस चमन में अब अपना गुजारा नहीं ,

बड़े अरमानो से बनायीं हुई ये बगिया
उजड़े अपनी आँखों के सामने ये हमें गवारा नहीं ,
ये मेरे दिल कहीं और चल ,
इस चमन में अब अपना गुजारा नहीं ,

हमें तो आदत थी तुफानो से लड़ने की
करते हैं कभी मुसीबतों से किनारा नहीं
ये मेरे दिल कहीं और चल ,
इस चमन में अब अपना गुजारा नहीं ,

दिल पर पत्थर रख कर निकलेगे अब
पर मालूम हैं की फिर मिलेगा ऐसा नज़ारा नहीं
ये मेरे दिल कहीं और चल ,
इस चमन में अब अपना गुजारा नहीं ,

हितेश कुमार शर्मा

5 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 03/09/2015
    • Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 03/09/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/09/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/09/2015
  4. Upendra Kumar t 06/09/2015

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