।।ग़ज़ल।।दर्द ये मंजूर है बेसक।।

।।ग़ज़ल।।दर्द ये मंजूर है बेसक ।।

इश्क में गम का आना, दस्तूर है बेसक ।।
हर कोई इस इश्क़ में, मजबूर है बेसक ।।

इश्क़ तो तन्हा की महफ़िल सजाता है ।।
हर किसी का दिल यहाँ बेकसूर है ,बेसक।

प्यार जिसका जितना ही परवान चढ़ता है ।।
उतना ही वह फासलो में दूर है बेसक ।।

इस इश्क़ में दिल के पैमाने नही होते है ।।
पर सभी को चाहतो का गुरूर है बेसक ।।

बस कुछ नही ये सिर्फ है गम इक दरिया ।।
पर हर किसी को दर्द ये मंजूर है बेसक ।।

……R.K.M