हर बे-ज़बाँ को शोला नवा कह लिया करो

हर बेज़ुबाँ को शोला-नवा कह लिया करो
यारो, सुकूत ही को सदा कह लिया करो

ख़ुद को फ़रेब दो कि न हो तल्ख़ ज़िन्दगी
हर संगदिल को जाने-वफ़ा कह लिया करो

गर चाहते हो ख़ुश रहें कुछ बंदगाने-ख़ास
जितने सनम हैं उनको ख़ुदा कह लिया करो

यारो ये दौर ज़ौफ़-ए-बसारत का दौर है
आँधी उठे तो उसको घटा कह लिया करो

इंसान का अगर क़द-ओ-क़ामत न बढ़ सके
तुम उसको नुक़्स-ए-आब-ओ-हवा कह लिया करो

अपने लिए अब एक ही राह-ए-नजात है
हर ज़ुल्म को रज़ा-ए-ख़ुदा कह लिया करो

दिखलाए जा सकें जो न काँटे ज़ुबान के
तुम दास्तान-ए-कर्ब-ओ-बला कह लिया करो

ले-दे के अब यही है निशान-ए-ज़िया क़तील
जब दिल जले तो उसको दिया कह लिया करो

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