ओ रात इतनी गुमशुम हो क्यों

ओ रात इतनी गुमशुम हो क्यों
क्यों ओढ़ी हो अंधकार की ये काली चादर
किसका इंतजार है तुमको
अपने आपसे क्यों हो इतनी बेखबर ,
अच्छा अब समझा ,
तुम तो माँ हो हमारी और
इस भूमण्डल की
तेरे बच्चे दिनभर व्यस्त रहते है कार्यों में ,
जब इससे बच्चो का दुःख देखा नहीं जाता
तो सबको अपनी बाँहों में समेत लेती है ,
सबको चैन की नींद के हवाले कर देती है
ओढ़ा देती है सबको निर्भीकता की चादर
और खुद बच्चो का पहरा करती है ,
हे माँ तू धन्य है ,तेरी ममता अनन्य है
जो हम सब के लिए सुख सम्य है ..

Leave a Reply