उस अरुणास्त की सौन्दर्यमयी वेला में

उस अरुणास्त की सौन्दर्यमयी वेला में
विहगों के कलरव में सिमटी वो शाम सुहानी
कह रही है पल-पल किसी के इन्तेजार की कहानी,
घुंघराले केशो वाली,मृग के जैसे नेत्रों वाली
अधरों पे अजीब सी थिरकन साथ लिए
आँखों में है किसी के आने की रुत ये सुहानी,
देख रही प्रियतम के पथ को
बेचैनी की आँखों से ,
कोमलता से युक्त करो में
दीपक की थाली जो साथ लिए
कर रही घर की देहरी को मस्तानी ,
आशा है आके चुमले वो रसीले अधरों को,
आगोश में करके इस धड़कन को ,
दे दे अपनी वो प्रेम निशानी
बस यही है मेरे दिल की कहानी ||

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