जीता हु जिनके यश पे गाता हु जिनके मै गीत

जीता हु जिनके यश पे
गाता हु जिनके मै गीत
हर आबो-हवा,हर ख़ुशी मेरी
मिली जिनसे विरासत में हमको
है दान किये मातृभूमि को प्राण जिसने
शत-शत उनको मेरा नमन है
है वो मेरे आदर्शो के सागर
जीवन पथ में हु जिनके बल से अग्रसर
है पूरी वसुधा ही जिनके लिए कुटुंब
ढूंढता हु जिनके जीवनवृतो में ,मै अपना बिम्ब ,
है इतिहास जिनका साक्षी
भारत के वो पवन है
शत-शत उनको मेरा नमन है …
किया अपनी प्रतिभा से चकित विश्व को जिन्होंने
दिया इस धरित्री को जगतगुरु का सम्मान
था प्यार जिन्हे इस भू के रजकण से
दिया विश्व को मोक्ष का साधन
सम नहीं है जिसके धन
उनके चरणो में हम निशि -दिन नत है
शत-शत उनको मेरा नमन है ….
किया न राग द्वेष किसी भी जन से
ऊँचा-निचा,ओछे-छिछले मन में न जिनके भाव है ,
नत को भी उन्नत करना ,
और न्यायार्थ अपने को भी दंड देना ,
जिनके जीवन धर्म का आदर्श है
इस वसुधा के उन उद्धारक का प्रतिक्षण हमें स्मरण है
शत -शत उनको मेरा नमन है …

Leave a Reply