गरीब अतीत

कुछ लोगों के गरीब अतीत पर थोड़ी सूरज की अनोखी किरण पड़ती है ,
और उनके गरीबी और दुखभरे दलदल को सुखा जाती है …
वो दलदल से बाहर आकर वर्तमान में शोहरत ,नाम,पैसा खुब कमाते हैं
और एक मोड़ पर आकर वो उस गरीब अतीत को भूल जाते हैं,
और अहंकार ,नाम और पैसे के नशे में धुत हो जाते हैं |
अतीत के सारे दरवाजे बंद कर देते हैं उससे नाता तोड़ लेते हैं
वो सोचने लगते हैं अब वो अतीत के लोग उनके बराबरी के नहीं हैं,
उनलोगों का औकात उनके औकात से मिलता नहीं है ,
पर वो शोहरत और पैसे के नशे में ये भूल जाते हैं,
जो कुदरत उनके गरीब अतीत के दलदल को सुखा सकता है
वो फिर से गरीबी के कहर की बरसात उनपर जरूर कर सकता है |

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/08/2015

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