तुम एक मारो, हम हज़ार मारेंगे

तुम एक मारो, हम हज़ार मारेंगे
हर सैनिक के बलिदान का , अब क़र्ज़ हम उत्तारेंगे
तुम एक मारो, हम हज़ार मारेंगे

कश्मीर का राग तुम , कुत्ते की तरह भोंकते हो
और मोहब्बत की पीठ पर खंज़र घोंपते हो
नफरत की भाषा बोलने वालो , तुम अच्छे वक़्त को पुकारोगे
तुम एक मारो, हम हज़ार मारेंगे

शहीदों के लहू को तुम्हे अब , आंसुओं से धोना पड़ेगा
अगर नहीं सुधरे तुम अब भी , तो हर पल रोना पड़ेगा
कश्मीर लेना तो दूर ,तुम अपना वतन भी हारोगे
तुम एक मारो, हम हज़ार मारेंगे

हिन्द से लोहा लेना तुम्हारे बस की बात नहीं
ले सको जो कश्मीर वो तुम्हारी औकात नहीं
कारगिल जैसी हार तुम बार बार स्वीकरोगे
तुम एक मारो, हम हज़ार मारेंगे

तुम्हे कौन समझाए , संवारती नहीं जिंदगी किसी के खून से
अरे कुछ तो खौफ खाओ ऊपर वाले के कानून से
खुद सुधर जाओ , नहीं तो हम तुम्हे सुधारेंगे
तुम एक मारो, हम हज़ार मारेंगे

नहीं भाता तुम्हे अमन चैन से रहना
अपने कर्मो का फल अब तुम्हे ही है सहना
जो फसल तुम बो रहे हो वो ही काट पाएंगे
तुम एक मारो, हम हज़ार मारेंगे

हितेश कुमार शर्मा

4 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 27/08/2015
  2. Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 27/08/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/08/2015
    • Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 27/08/2015

Leave a Reply