मायूस हो जाते हैं

मायूस हो जाते हैं जाने क्यों,
हमें फिर से सम्भलता देखकर,
मुश्किलों में पड जातें हैं जानें क्यों,
हमें मुश्किलों से निकलता देखकर,
रोशन चिराग बुझाने के लिए
बारिशों की दुआऐं मांगतें हैं,
पानी पानी हो जातें हैं जाने क्यों,
हमें फिर से सुलगता देखकर,
खिले फूल मुरझाने के लिए
हर वक्त ख्वाहिश करतें हैं,
मुरझा हो जातें हैं जाने क्यों,
हमें फिर से महकता देखकर,
चहचहाते परिदें की मौत की
चाहत किया करतें हैं,
जल जातें हैं जाने क्यों योगी,
हमें फिर से चहकते देखकर,