प्रेम पूर्ण हो भाई-चारा

प्रेम पूर्ण हो भाई-चारा..
घर-घर में हो यह नारा..
इंसानियत से महके जग सारा..
मानवता है प्रथम धर्म हमारा..
प्रेम पूर्ण हो भाई-चारा..

हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाइ..
बने सभी भाई-भाई..
इंसानियत की डोर न काटो..
जाती -धर्म की रीत को पाटो..
जीवन पथ कंटीले दुर्गम हैं.
मीठी वाणी में सरगम है..
मंदिर, मस्जिद हों..भले अनेक ..
ईश्वर तो है, सिर्फ़ एक..
मानवता है प्रथम धर्म हमारा..
प्रेम पूर्ण हो भाईचारा..

जग में कैसी ये रीत है..
जाती- धर्म से लोगों की प्रीत है….
धर्म से उपर उठे समाज..
मानवता ही धर्म बने आज.
करे कोई भी चाहे राज.
सुख समृद्धि में रहे समाज..
हर इंसान बदले अपना विचार..
करे विचारों का संचार.
ज़रूरत मंद की मदद करेंगे..
मिल-जुलकर हम सब संग रहेंगे..
ऐसा हो लक्ष्य हमारा..
प्रेम पूर्ण हो भाई चारा..

कहते सभी संत और ज्ञानी.
जीवन में कभी मत बनो अभिमानी..
राह कठिन है जीवन की..
यह सिर्फ़ भ्रम है मन की..
समझो प्यासे के लिए अनमोल है पानी.
यही है मानव ज़िंदगानी |