अभी बाकी है हर जगह भरने को कुछ सुनहरे रंग

रंगों से रंगीन हुयी नहीं है ये ज़िंदगी
अभी बाकी है हर जगह भरने को कुछ सुनहरे रंग |
घनी बदरी तो है छायी पर बरसी नहीं
अभी बाकी है देखने को प्यारे बूंदों के रंग |
खिलखिलाती हँसी सुनी पर नूर नज़र आया नहीं
अभी बाकी है निहारने को उसके अदा के पक्के रंग |
चमकती धानी चुनर की चमक पहुंची आँखों तलक पर
अभी बाकी है सँवारने को घूंघट के पीछे का रंग |
अम्बर से तिनके जोड़ आशियाना तो बनाया है
अभी बाकी है सजाने को उस आशियाने में खुशियों के रंग |
जख्म के धधकती धूप को प्यार के नरम पत्तों से सहलाया है पर
अभी बाकी है उस पर लगाने को अपनापन से भरा मरहम का रंग |
रंगों से रंगीन हुयी नहीं है ये ज़िंदगी
अभी बाकी है हर जगह भरने को कुछ सुनहरे रंग |

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