रक्शाबन्धन

भैय है मेरा अनमोल,
इसका नही कोई तोल-मोल-बोल।
इत्राता बलखाता चहू ओर.
जीत लेता है सबके मन को भोर-भोर।
बलिहारि जाती मै उसपर बारम्बार,
नज्र्र लगने ना पाये उसे कभी भी करतार
इस पार या उस पार,
खुदा से यही दुआ है मेरी,
साथ रुकसत ना हो हम बह्न- भाई का कभी,
और मनाते रहे रक्शाबन्धन का अनोखा पर्व हर साल साथ-साथ ही।

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 23/08/2015
  2. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 24/08/2015

Leave a Reply