।।गजल।।हालात के चलते मैं।।

।।ग़ज़ल।।हालात के चलते मैं।।

तुमसे दूर हूँ तेरे जज़्बात के चलते मैं ।।
खुद से मजबूर हूँ हालात के चलते मैं।।

कोई गम नही तू मुझे याद कर न कर ।।
भीगता हर ऱोज हूँ बरसात के चलते मैं ।

ठहर क्यों जाती हो मेरे दायरे के बाहर ।।
वादा तोड़ न पाया तेरी बात के चलते मैं।

मुफ़्त में उम्र गुजार देना भी गुनाह है ।।
पर रोक न पाया औकात के चलते मैं ।।

ऐ दोस्त रब मिले न मिले तू चली आना ।
तन्हा ही रह जाउगा सौगात के चलते मैं।

…….R.K.M

6 Comments

  1. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 24/08/2015
  2. रकमिश सुल्तानपुरी राम केश मिश्र 24/08/2015
  3. Chirag Raja 24/08/2015
  4. रकमिश सुल्तानपुरी राम केश मिश्र 25/08/2015
  5. Ankita Anshu Ankita Anshu 25/08/2015
  6. रकमिश सुल्तानपुरी राम केश मिश्र 25/08/2015

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