बचपन

बचपन शब्द सुनते ही,
याद आ जाता है
माता पिता का प्यार
दादा-दादी का दुलार
वो नन्ही नन्ही अटखेलियां
भाई-बहन के संग
खिलौंनों को लेकर मस्तियाँ
क्या सभी का बचपन
ऐसा होता है?
माता पिता का दुलार
हर बच्चे को नसीब होता है?
या झोंक दिया जाता है बचपन
उन भाटियों में, ढ़ाबो में
और झूठे बर्तनों में
क्यों हम अपनी ऑंखें
बंद कर लेते है
जब देखते है ऐसे
बचपन को?

बी.शिवानी

2 Comments

  1. kaushlendra prapanna 27/08/2015
    • भारती शिवानी 27/08/2015

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