मुकाम

अजीब कशमकश में है जिंदगी
क्या किया जाए
नजदीकियाँ बन गयी दुरियाँ
आँखों से ही नहीं
बल्कि दिल से भी ओझल हो चुका हूँ मैं उसकी
मुश्किल हो गया है साथ रहना
जुदा भी नहीं हो पा रहे है हम
जमाने को दिखा के
एक नुमाइश बन के रह गए है हम
वो चाहती है एक नयी और जिंदगी
पर मैं खुश हूँ
इसी तरह
जिंदगी के साथ समझोता करते हुए
पर बेचारी वो भी न कर पाती
पर चाहती है….
बलि चढ़ गया मैं
गुमराह हो गया मैं
दिल चीख चीख के पुकारें
ओ मृत्यु के द्योतक
ले के जाओ न हमें
जिंदगी में अभी कोई कशिश न रही
यह विवशता अब हमें और सहन नही होती
जग भी हसेगा
हमारी इस लाचारी पे
झकझोर के रख दिया हमको सभी ने
ओ बंदा-परवर
वागडोर तो है आपके हाथ में
कुछ तो किजीए
कि हो जाए कुछ ऐ सा निराला
फिर से मसरूफ हो जाए दोनों
फिर से महक उठे ये जिंदगी हमारी
बल्कि कुछ एहसान ही किजीए
इस बवंडर से निकाल ले जाए हमें
उस मुकाम तक
जहाँ से कोई न लौत पाए……!!

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