चाहत-ए इश्क़

चाहत-ए इश्क़ भी अजीब है …
कुछ कहानियाँ पूरी नहीं हो सकती
ये हमसब जानते हैं …
फिर भी आस लगाये बैठे रहते हैं |
जैसे चकोर को ही देख लो
उसे पता है उसकी ख्वाहिश पूरी नहीं होगी
फिर भी वो आज भी चाँद को चाहता है

2 Comments

  1. Ajay Kumar Ajay Kumar 22/08/2015
  2. indravidyavachaspatitiwari 22/08/2015

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