आँसू है कुछ ऐसा पानी

आँसू है कुछ ऐसा पानी

आँसू है कुछ ऐसा पानी
गीतों में है झर झर बहता
भारी मन मेरा भी जैसे
पलकों में है सब कुछ कहता

तोड़ रहा शब्दों के पत्थर
बहता आँसू भीतर भीतर
अर्थ वही है, दर्द वही है
हर आँसू है अक्षर अक्षर

लिखना चाहूं लिख न सकूं तो
आँसू मेरा मुझपर हँसता
आँसू है कुछ ऐसा पानी
गीतों में है झर झर बहता

नाव नहीं, पतवार नहीं है
दर्द भरी मँझधार मिली है
आँधी ले हर आह उठी है
आँसू में पीड़ा उभरी है

व्यथा वेदना की लहर तले
पंक्ति बद्ध हो आँसू बहता
आँसू है कुछ ऐसा पानी
गीतों में है झर झर बहता

तारों से कुछ कंपन लेकर
काँटों से पीड़ा को बुनकर
हर आँसू जो बनता नश्वर
रचता जाता गीत निरंतर

क्षण-भंगुर पीड़ा का झरना
हरदम गीतों में है बहता
आँसू है कुछ ऐसा पानी
गीतों में है झर झर बहता

मन कहता उस पार चलूं मैं
दर्द उठे, चुपचाप सहूं मैं
बहता आँसू रोक सकूं मैं
नम पलकों का मीत बनूं मैं

गीत लिखूं कुछ ऐसा जिसमें
दर्द भरा अक्षर हो हँसता
भारी मन मेरा भी ऐसा
आँसू बनकर सब कुछ कहता

आँसू है कुछ ऐसा पानी
गीतों में है झर झर बहता
—- ——- —- भूपेंद्र कुमार दवे

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