हसरतें

चलती रहें सांसे
और कोई तमन्ना न रहे
इस पार से उस पार
जाने पे कोई शिकवा न रहे

सहारा उसका जो मिल. जाये
तो बाकि कोई ज़रुरत ना रहे

दुनिआ में आना
उसके रंगों में रंग जाना
इसमें अपना ही इक मज़ा है
पर जिसने रंगों को बनाया
और दुनिआ को सजाया
उसके रंग में रंग जाना
कुछ और ही कला है

कभी झलक अपनी दिखता है वोः
पल भर में दीवाना बनता है वोः
हर बंधन से भी छुड़ाता है वोः
भरें हम उड्डाण कैसे
रास्ता उसका भी दिखता हैवोः

बची हों सांसे कुछ बाकि
और हसरतें तब भी जागती रहे
आने जाने का सिलसिला भी
फिर यूं ही सदा चलता रहे , चलता रहे

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