ग़लतफ़हमी

रिश्तों में सुलगी ग़लतफ़हमी की आग
सिर्फ भरोसा और समझ के बारिश से ही
बुझ सकती है …….
अन्यथा उस आग की लपट में
बसे -बसाये प्यार के घर जल जाते हैं ….
और फिर बाद में अफ़सोस की राख
हमारे हाथों में रह जाती हैं …….

3 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 21/08/2015
    • Ankita Anshu Ankita Anshu 22/08/2015
  2. Dr Talaha 29/08/2015

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