रंग लो कान्हा अपने रंग में

रंग लिया तूने अपने रंग में
अब ले चल कान्हा अपने संग में
मोह में फँस सब कुछ भूले
चाहा बढ़ के गगन को छु लें
गहरी नींद से तूने जगाया
जीवन का हर रंग दिखाया
भोले थे कितना समझया
प्रीत का नया ढंग सिखाया
याद तुम्हे जब करती हूँ
मौसम बदल से जाते हैं
सूखी मुरझाई शाखाओं पे
फूल भी रंग बरसाते हैं
बादल बन आकाश को छूलें
भाव ऐसे भी आते हैं
तेरे चरणो में जब आती हूँ
मन बांवरा हो जाता है
धीरज भी खो जाता है
चंचल विचलित मन यह मेरा
चैन की नींद सो जाता है
रंग लो कान्हा अपने रंग में
अब लेलो कान्हा अपने संग में

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