मेहरबां होने को हैं लोग

बडे अदाकार हैं इस बस्ती के लोग,
दिल तोडने को मजाक समझते हैं लोग,
चुपचाप गुजर जा रंगमंच से ऐ दिले नादां,
अहसास की आवाज सुन लें कहीं ना लोग,
नाराज होतें हैं तो दिल बदल लेतें हैं,
अपने हमसाए का घर तक जला देतें हैं लोग,
दिल ही जब चाहतों से भर गया योगी,
सुनतें हैं हम पे मेहरबां होने को हैं लोग,

2 Comments

  1. Meharban Singh 20/08/2015
    • yogesh sharma yogesh sharma 21/08/2015

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