वजूद की तलाश

निकला जो वजूद की तलाश में,
मिला एक मोड पे खुदी से मैं,
हरदम खुश रहने वाला था जो कभी,
कितना उदास अब लगता हूं मैं,
मिल जाए कभी जवाब उदासी से,
खुद से ही सवाल पूछता हूं मैं,
आईना देख कर लगा यूं की जैसे,
किसी अजनबी से शायद मिला हूं मैं,
ना आवाज, ना अहसास, ना ही थे आंसू योगी,
वक्त के साथ कहीं खो गया हूं मैं,

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