यही खवाहिश है

जिन्दगी में मिलतें हैं यूं तो कई रंग,
पर खो गया है इन रंगो में वजूद आदमी का,
हर तरफ झगड.ा फसाद और बेवफाई है,
आदमी ही बन गया है दुश्मन आदमी का,
मजहब की आढ में बांटनें चलें हैं सब कुछ,
भूल गए रंगतें खून एक है आदमी का,
शैतान बनना आसान है आदमी के लिए,
इन्सान बनना कहां मुशकिल है आदमी का,
हर तरफ अमन हो यही खवाहिश है योगी,
के जीवन बन जाए स्वर्ग आदमी का,

3 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 19/08/2015
  2. yogesh sharma yogesh sharma 19/08/2015
  3. nikhil mehta 27/08/2015

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