Ran_Premi whi to hai ……… by tushar gautam

वहीं तो है
जो रहते है हर दम
सीमा पर तन के
हो प्राप्त वीरगति को
खातिर वतन के
दिवाली पर होली
खेलते जी रण में
जिनके लहू की क़ुरबानी
होती हर क्षण में

नित संग्राम करें जो
लहू के कूप भरें जो

ऐसे रणप्रेमी वहीं तो है

रणांगण प्यार जिनका
वही जिनका संसार है
खौलता लहू है जिनका
विष जिनका आहार है
हथियारों के खिलौने
रखते जो हाथो में
ताकि सोएं चैन से हम
जगते वो रातों में

जीवित रहें जतन पर
त्यागें प्राण वतन पर
ऐसे रण प्रेमी वहीं तो है

तुषार गौतम “नगण्य”

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/08/2015
    • Tushar Gautam गौतम "नगण्य" 17/08/2015
  2. raaghv raaj 23/08/2015

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