मेरा नवोदय

उन दीवारो से कही,
फिर से टकरा जाए |
हर जन्म का उससे,
एक रिश्ता बन जाए ||
मेरे नवोदय तुझमे समायी है,
मेरी कुछ सांसे |
काश फिर से वो,
सांसे मिल जाए ||
बदला न कुछ भी तुझमे,
पर यहाँ सब बदल गया |
पहले जीते थे तुझमे,
आज खुद से जीना आ गया ||
पर मासूम है दिल अभी भी,
याद करता है ये तुझको अभी भी |
काश ये ठहरी हुई मंज़िल मिल जाए,
मुझे मेरे नवोदय की ज़िंदगी मिल जाए ||
रचयता सोनिका मिश्रा

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