तेरे साथ चलना आता है मुझे……..(कविता)

तेरे साथ चलना आता है मुझे……..

तू याद करे न करे , हमें याद करना आता है तुझे,
तू प्यार करे न करे, हमें प्यार करना आता है तुझे.

हर अजनबी पराया नहीं होता, हर हमसफ़र हमारा नहीं होता.
दिल जिसे अपना समझने लगता है , एक दिन पता चलता है कि वो हमारा नहीं होता.

सदियाँ बीत जाती हैं , ज़माने गुज़र जाते हैं,
चलते चलते , हम – तुम भी आगे निकल जाते हैं.

कुछ याद आता है , कुछ हम खुद ही भूल जाते हैं,
ना जाने कैसे रिश्ते हैं , ना जाने कैसे नाते हैं.

पर हर पल एहसास यही होता है मुझे,कि ……..
तू साथ चले न चले, तेरे साथ चलना आता है मुझे.

डॉ. संचिता श्रीवास्तव