सच

कोई जीतने की चाहत रखता है,
कोई प्यार की इबादत करता है |
बड़ा कमज़ोर है आदमी,
सोचता है पाने को मंज़िल,
पर हाँथ खाली रखता है ||
ज़िंदगी के मायने अलग है यहाँ,
पर मौत की हकीकत एक है |
झूठ स्वार्थ की माया है ज़िंदगी,
पर मौत की शख्सियत एक है ||
क्या बुरा क्या भला किसको पता,
फिर क्यों सभी को,
अपने ही पैमाने में रखते है लोग |
डर से सच भी न कह सके,
ऐसे डर में क्यों जीते है लोग ||
रचयता सोनिका मिश्रा

3 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 14/08/2015
  2. Tushar Gautam गौतम "नगण्य" 14/08/2015
  3. SONIKA SONIKA 14/08/2015

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