वीर

मेरी डुबती हुई कश्ती को
कोई तो पार लगाए
तुफानों से घिर गया मैं
न ताकत है न हिम्मत
इस बेसहारे को कोई तो बचाये
जी जान लगाके कोशिश की
दिमाग में भी जोर लगाया उतना
जितना मुझसे हो सके…..
झेलते झेलते साहिल तो पानी ही थी
पर हर तुफानों को झेलना
आसां नहीं इतना….

कोई तो हिम्मत जुताए
कोई तो भरोसा दिलाए
लड़ना है तुमको
जितना है तुमको
न जीत पाओ
तो भी कोई बात नहीं
पर बुजदिल न बनो
मरने से पहले ही
हार मत मानो..
आखिर मरना तो है एकदिन सबको
क्श्ती किनारे लगे न लगे
तुम किनारा मत हो जाओ
कहते है लोग सभी
इसी का नाम जिंदगी है
जिस में तुफान ही तुफान होती हैं
कई……….
कोई छोटी तो कोई बड़ी
तबाही मचाती है
ठिठड़ विठड़ उठल पुठल हो जाती है जिंदगी
पर कोई ऐसा सख्स भी होता है
जो खड़ा हो उठता है

खोने पाने का गम भूलकर
कश्ती फिर से बनाती है, फिर से चलाती है
पार तो लगाना ही था उसको
जिसे हम वीर कहलाते है…..!!

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