कुछ हिन्दू और कुछ मुसलमान

देखो अलग अलग कब्रिस्तान हो गए |

कुछ हिन्दू और कुछ मुसलमान हो गए ||

दुआ एक है सबकी जुबान पर लेकिन,

सुनने वाला अल्लाह औ’ भगवान हो गए ||

भुला दिया सबने धर्म का मर्म दिल से,

चार पोथी क्या पढे, बदजुबान हो गए ||

जन्म सबका एक सा रंग लहू का एक सा,

फिर क्यों एक-दूजे से बेईमान हो गए ||

कोई नहीं दिखता इंसानी रंग में ‘माही’,

सब मज़हबी रंग के सामान हो गए ||

: महेश कुमार कुलदीप ‘माही’
जयपुर, राजस्थान

3 Comments

  1. Lalitkuldeep lalit kuldeep 10/08/2015
    • mkkuldeep महेश कुमार कुलदीप 'माही' 10/08/2015
  2. रोशनी यादव रोशनी यादव 10/08/2015

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