* नेताजी बने लेखक *

नेताजी बने लेखक
लिखन लागे किताब
एक तो उनकी नाम बढ़ी
दूजे हुई लक्ष्मी की वरसात ,

वो करें एसी खुलासा
जिस पर हो विवाद
बढे उन्की प्रसिद्धि
बनी रहे पहचान ,

उन्होंने कई बार पाला बदला
कई बार बदली पार्टी
कुर्सी पद प्रतिष्ठा के लिए
वे भांजे लाठी ,

समय पर वे कुछ न बोले
सही-गलत को न तौले
अपनी सुविधा के लिए मुख खोले
उन पर नरेन्द्र कैसे करें विश्वास ,

उनकी लेखणी हमें भाता नहीं
जन की समस्या कोई उठाता नहीं
न दिखाते हैं राह रस्ता समाधान
फिर हम क्यों करें उन्का गुण-गान ,

नेताजी बने लेखक
लिखन लागे किताब।

प्रस्तुतकर्ता- नरेन्द्र कुमार

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