नज़र से नज़र की बात

नज़र ने तेरे
नज़र से मेरे
नज़र की बात की थी
पल दो पल की नहीं
सदियों से लम्बी बड़ी………
मुलाकात की थी
बंदिशें……
थीं जो दरम्याँ कुछ
नज़रों में ही टूट गईं
पर इतेफ़ाक़
ये भी कुछ अज़ीब था,
कि बात सारी
जो भी हुई
नज़रों में ही छूट गई।
© राजीव उपाध्याय

2 Comments

  1. Dr. Nitin Kumar pandey Dr. Nitin Kumar pandey 10/08/2015
  2. rajeevupadhyay Rajeev Upadhyay 10/08/2015

Leave a Reply