कुछ कर के तो देखो ।

ऐसा कोई एक काम कर के तो देखो
हौसला एक मन मे बढ़ा कर तो देखो
पाओगे मंजिल को कुछ ही पल में
एक कदम आगे बढ़ा कर तो देखो।

रोते हुए को हंसा कर तो देखो
किसी के आँसू को अपनाकर तो देखो
पाओगे मन में खुशियाँ अनेक
किसी के लिए आँसू बहाकर तो देखो ।

पाना है दर्द तो प्यार कर के देखो
हो न विश्वास तो आजमा कर देखो
भूल जाओगे तुम प्यार की दुनियाँ को
किसी को अपना बना कर तो देखो ।

जीवन के इस राह पर चल कर तो देखो
डगमगाऐंगे कदम खड़े होकर तो देखों
रोकेगी दुनियाँ हर मोड़ पर तुम्हे
कदम जरा अपना बढ़ा कर तो देखो ।

जालिम दुनियाँ का हाथ थम कर तो देखो
होना है कंगाल तो आजमा कर देखो
मुसीबत में पास आऐ न दुनियाँ
किसी मुसीबत में तुम पड़ कर तो देखो ।

“ऐसी खींच लकीर हांथ पर, जो कोई तोड़ न पाये ।
मतलबी इस दुनियाँ पर, बस नाम तेरा ही छाये” ॥

संदीप कुमार सिंह ।

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