इंसानो के देवता

अरे ओ देवता! इंसानो के,
क्या तुम भी इंसान हो?
मानवतावाद के विपरित
जो तुमने मोर्चा खड़ा किया।
क्या हित है इसमें जन का?
या फिर
कहो
अरे ओ देवता(क्षुद्रता की प्रतिमूर्ति)
स्वयं के लिए किया
अपने स्वार्थ में लीन
अरे ओ ईश्वरीय शक्ति !
तुम इंसान हो या हैवान
इंसानियत तो तुझमे नजर नही आती
क्या तुमने
स्वयं को
अन्नदाता समझ लिया?
अरे दरिद्र !
तुम क्या जानो
अन्न के नाम पर
तुमने क्या जुर्माना भरवाया है हमसे।
चलो मान लिया ,
तुझे मैंने देवता।
क्योंकि देवता बनने के लिए,
तुझपर कृपा थी जान की।
क्या तुम जानते हो उस कुर्सी की कीमत
जिस पर बैठ कर तुम ,देवता बने फिरते हो
निचोड़ा करते हो,मरोड़ा करते हो
गरीबो की इज्जत और उनकी मेहनत ।
मुझे शक होती है तुम देवता हो!
मुझे तकलीफ होती है,तुम देवता हो|
मुझे विश्वास नही होता कि
तुम मानवतावाद के देवता हो।

5 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 09/08/2015
    • रोशनी यादव ROSHNI KUMARI 09/08/2015
  2. Lalitkuldeep lalit kuldeep 09/08/2015
    • रोशनी यादव रोशनी यादव 09/08/2015
  3. Gurpreet Singh 19/12/2015

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