na jane kha kho gyaa ….. by tushar gautam

खफा खफा था वो सबसे
दुःख जता कर सो गया
भारत माँ के आंसू का कतरा
ना जाने कहाँ खो गया

धर्म धर्म पर बँट रहा है
बँट रहा है भारतवासी
भूल गए है ये क़ुर्बानी
क्या पंजाब और क्या झाँसी

भगत सुभाष आज़ाद ने
जिस पर अपनी जान लुटा दी
वो देश आज है बहुत पीछे
बहुत आगे उसकी आबादी

दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है
पहले से अगला घोटाला
सफेद दूध पर भी लगा है
घपले का धब्बा काला

दो घटा कर सात बढ़ाए
बढ़ाए ये वादों का पहाड़
दस में से आठ घर ले जाएं
विकास की जगह सूखा झाड़

विकास की महँगी राह से
विकास ही कहीं खो गया
भारत माँ के आंसू का कतरा
ना जाने कहाँ खो गया

इन धर्मो के कुचक्र में
वेद पुराण बंद पड़े है
नही कर रहा कोई कुछ
सद कानून दंग खड़े है

तिनका तिनका चुभ रहा है
भारत माँ खड़ी है मूक
जो बाँट दे इस देश को
यह सत्ता की कैसी भूख

भूखो इस बाजार में
राष्ट्रभक्त भी बिक रहा
बिक रहा है यह हर सत्य
सिर्फ पैसा ही देख रहा

चीख रही भारत माँ
क्यों बर्बादी देख रहे हो
अपने हाथो स्वयं तुम
अपनी माँ को बेच रहे हो

इन जालिमो की संसद में
देश भक्त भी सो गया
भारत माँ के आंसू का कतरा
ना जाने कहाँ खो गया

तुषार गौतम ” नगण्य “

2 Comments

  1. संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 08/08/2015
    • Tushar Gautam गौतम "नगण्य" 09/08/2015