क्यों वह मुझसे मिलने न आयी…?

क्यों वह मुझसे मिलने न आयी…?

काश कहीं वो नजर आ जाऐ
मेरे दिल को भी चैन आ जाऐ
एक बार मुशकुरा के चली जाऐ
सारा दिन खुशियों से भर जाऐ।

बैठा हूँ मै राहो में उनके
एकपल भी मेरी पलके न झपके
सोंचू यही मैं रह-रह के
कहीं आएगी वह रूप नई धर के ।

बैठे बैठे अब शाम चली आयी
जिसका था खयाल पर वह न आयी
सुबह हुई तो खबर नई आयी
उसे भुलजाने की खबर है भिजवायी ।

बैठे-बैठे मेरे मन मे खयाल आयी
क्यों वह मुझसे मिलने न आयी…?
क्या खाता हुई जो मुझे न बतायी
क्यों वह मुझसे मिलने न आयी…?

संदीप कुमार सिंह ।

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