||ग़ज़ल सारथी|| तमन्ना जाग उठती है तेरे कूचे में आने से

तमन्ना जाग उठती है, तेरे कूचे में आने से
तेरे चिलमन हटाने से, जरा सा मुस्कुराने से !!

अजब ही दौर था जालिम, ग़ज़ल की नब्ज़ चलती थी
मेरी पलकें उठाने से, तेरी पलकें झुकाने से !!

कहीं जाओ, मगर अच्छे मकां, मिलते कहाँ हैं अब
हमारे दिल में आ जाओ, ये बेहतर हर ठिकाने से !!

पतंगों सा गिरा कटकर, तेरी छत पर अरे क़ातिल
कि बाहों उठाले तू, किसी तरह बहाने से !!

हमारे नाम से साकी, सभी को मय पिला देना
सितारे रतजगा के हैं, थके -हारे जमाने से !!

लुटा शुहरत गवां दौलत, मजे में ‘सारथी’ देखो
अमीरी है फ़कीरों सी, घटेगा क्या लुटाने से !!

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 08/08/2015
    • Saarthi बैद्यनाथ 'सारथी' 12/08/2015

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