main panchhi hu kedi nahi hu ……… by tushar gautam

आसमां का छोर नहीं है ,
ना उदय ना अंत है उसका
उन्मुक्त है गगन ये सारा
माप भी अनंत है उसका
मैं पंछी हुँ कैदी नही हुँ
जंजीरो में मत जकड़ो
चखने दो दाना अम्बर का
द्रण हाथों से मत पकड़ो

तुषार गौतम ” नगण्य “