एक ही उसूल …. / गज़ल

अपना तो एक ही उसूल है |

सुख-दुख दोनों कुबूल है ||

हिसाब इतना ज़िंदगी का,

थोड़े से फूल थोड़े शूल है ||

जो भी मिला दिल खोल मिले,

जग की तंगदिली खूब है ||

हर मोड़ बदले रूप बदला,

ज़िंदगी इक इंद्रधनुष है ||

सदियाँ कम है प्यार में,

लड़ना-मारना फ़िजूल है ||

ये तेरा और ये मेरा है,

‘माही’ मन की भूल है ||

:- महेश कुमार कुलदीप ‘माही’

One Response

  1. Chirag Raja 08/08/2015

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