हमें भी इन सितारों में एक जगह बनानी है (महर्षि त्रिपाठी )

जिसने दिया हमें आदर्श शिष्य की पहचान
गुरु को दे अंगूठा जब एकलव्य बने महान
हो लगन कुछ सीखने की इनसे सीखे हम
जग को हिला सकते नहीं किसी से पीछे हम
गुरु-शिष्य की फिर वही परम्परा जगानी है
हमे भी इन सितारों में एक जगह बनानी है |

अपने प्राणों की आहुति देकर जो चले गये
इन्कलाब का नारा दे ,गोली खाकर जो चले गये
स्वतंत्रता -गणतन्त्र दिवस पाठशाला तक सिमट गये
जिनके हाथों में बागडोर वो मधुशाला तक सिमट गये
जो भूल गये भारत माँ को ,फिर उनको याद दिलानी है
हमे भी इन सितारों में एक जगह बनानी है |

अपना भारत भूल गया ,स्त्री देवी होतीं हैं
देख दशा इनकी अबतो ,भारत माँ भी रोती हैं
कहीं चीखे ,कहीं, बाहें अब तो रोज उठती हैं
कभी निर्भय ,कहीं मीना अब तो रोज लुटती हैं
हमको हर घर-घर में अब गीता बबिता लानी है
हमे भी इन सितारों में एक जगह बनानी है |

आओ जरा इतिहास को पलटो
हर पापी की साख को पलटो
उदहारण तुम्हे बहुत मिलेंगे
आगे आओ ,साथ बहुत मिलेंगे
हमसब को मिलकर ,भारत की संस्कृति वापिस लानी है
हमे भी इन सितारों में एक जगह बनानी है ||

मौलिक
–महर्षि त्रिपाठी