रिश्तों की गहराई

दिल परायो से नहीं,
अपनों से ही टूटा करता है |
जिसे मनो हद से ज्यादा,
वही रूठा करता है ||
दिल को भी पत्थरों से,
मोहब्बत होती है |
टकरा के टूट जाता है अक्सर,
पत्थरों से दोस्ती की कीमत यही होती है ||
फिर भी दिल बरस जाता है,
जब वो तपता है धूप में |
देता है साथ पत्थरों का,
कभी जल तो कभी थल के रूप में ||

2 Comments

  1. Tushar Gautam गौतम 07/08/2015
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 30/08/2015

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